शनिवार, 5 मार्च 2011

क्या मै खुश हु

कुछ लोग सुखी दीखते है। लेकिन वे इस पर अधिक नहीं सोचते है। योजनाये बनाते है।
कोई सोचती है की मेरा एक पति होगा, एक घर होगा, दो बच्चे होगे, एक अच्छाघर होगा।
वे यहो हासिल करने में लगे रहते है। वे मनमाफिक प्रतिक्रिया करते है, वे ग़लतिया करते है। लेकिन वे नहीं जानते मंजिल कहा है। वे कार खरीद लेते है कभी कभी फरारी भी। वे सोचते है की जीवन का अर्थ यही है। वे इस पर कोई सवाल नहीं करते है बस जिए जाते है।
लेकिन ......
उनकी आँखों में उदासी दिख जाती है। वे नहीं जानते है की उस उदासी को वो अपनी आत्मा मै समाये घूम रहे है।
सारे के सारे व्यस्त है ओवर टाइम करते है अपने बच्चे अपने पति अपने कैरियर अपनी डिग्री के बारे में चिंता में लगे है ताकि वे कुछ खरीद सके ताकि वे किसी से कम या निचे न लगे।
कम लोग जानते है की वे दुखी है ज्यादातर कहते है की मै अच्छा हु मेरे पास वह सब कुछ है जो मै चाहता हु घर परिवार, कम, अच्छी सेहत, सब कुछ।
क्या इस सभी से ही ख़ुशी मिलती है। बच्चे जो बड़े हो कर आपको छोड़ देंगे । पत्नी जो एक प्रेमी प्रेमिका की जगह सिर्फ एक दोस्त ही बन जाएगी। एक दिन आपके काम का अंत हो जायेगा।
हम हमेशा उस चीज के बारे में बात करने लगते है जो हमारे पास नहीं है
एक व्यापारी उस सौदे के बारे में बात करता है जो की वह अभी तक नहीं कर पाया है।
घरेलु लड़की ज्यादा आज़ादी ज्यादा पैसा चाहती है
प्यार में डूबा लड़का अपनी महबूबा को खो देने के ख्याल से भयभीत रहता है।
छात्र सोचता है की इस कैरियर को उसने चुना या उसके लिए किसी दुसरे ने । क्या वो यही कैरियार को चुनना चाहता था। या वो क्या चाहता था
दांतों का डाक्टर गायक बन ना चाहता है। गायक नेता बनना चाहता है, नेता लेखक बनना चाहता है जब आप उससे मिलते है जो वही करता है जो की वह करना चाहता था। वो भी शांत नहीं है उसकी आत्मा मै भी अशांति है उससे पूछिये क्या वो खुश है।

2 टिप्‍पणियां:

Kulwant Singh ने कहा…

bahut badhiya Bhandari ji lage raho.

संगीता पुरी ने कहा…

इस नए सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!